ईरान युद्ध के बीच अमेरिका का बड़ा सैन्य कदम, सीरिया से पूरी फौज हटाकर कई बेस खाली, जमीन सीरियाई सरकार के हवाले

ईरान युद्ध के बीच अमेरिका ने सीरिया से अपनी सैन्य मौजूदगी समेट ली है। जानकारी के मुताबिक अमेरिकी सेना ने अपने सभी प्रमुख बेसों से सैनिकों को वापस बुलाकर नियंत्रण सीरिया की सरकार को सौंप दिया है। इस कदम के बाद कई सैन्य ठिकाने पूरी तरह खाली नजर आ रहे हैं और वहां से सैनिक अपने वाहनों में सामान लादकर रवाना होते दिखे हैं।

हसाका प्रांत का कसराक एयरबेस खाली, भारी उपकरणों के साथ रवाना हुई अमेरिकी सेना
जानकारी के अनुसार अमेरिकी सेना ने सीरिया के हसाका प्रांत में स्थित कसराक एयरबेस को पूरी तरह खाली कर दिया है। बताया जा रहा है कि यहां मौजूद भारी सैन्य उपकरणों और संसाधनों को भी समेटकर सेना वहां से निकल गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक सीरिया में अमेरिका के ज्यादातर सैन्य ठिकानों को अब खाली किया जा चुका है।

सेंट्रल कमांड का बयान, कहा- योजना के तहत उठाया गया कदम
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रवक्ता ने इस कार्रवाई को लेकर बयान दिया है कि यह पूरी तरह सुनियोजित तरीके से उठाया गया कदम है। साथ ही अमेरिका ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह आतंकवाद के खिलाफ अपने सहयोगियों का समर्थन जारी रखेगा, भले ही सैनिकों की तैनाती में बदलाव किया गया हो।

सीरिया का दावा, अमेरिकी सेना की वापसी देश की संप्रभुता की जीत
सीरिया की ओर से इस घटनाक्रम को बड़ी कूटनीतिक जीत बताया गया है। विदेश मंत्री ने कहा है कि अमेरिकी फौज का देश से जाना सीरिया की संप्रभुता की वापसी जैसा है। उनका कहना है कि कुर्द लड़ाकों और सीरियाई सरकार के बीच हुए समझौते के बाद यह फैसला सामने आया है। इसके साथ ही सरकार ने आईएसआईएस के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई तेज करने की बात कही है। गौरतलब है कि इससे पहले अमेरिका ने जॉर्डन सीमा के पास स्थित अल तनफ बेस को फरवरी में ही खाली कर दिया था।

क्या अमेरिका को लगा है रणनीतिक झटका?
अमेरिका लगातार यह दावा करता रहा है कि उसने ईरान की सैन्य क्षमता को बड़ा नुकसान पहुंचाया है, जबकि ईरान इन दावों को खारिज करते हुए संघर्ष जारी रखने की बात कह रहा है। वहीं अमेरिका समय-समय पर बातचीत की इच्छा भी जताता रहा है। ईरान का रुख है कि वह युद्ध और शांति दोनों परिस्थितियों के लिए तैयार है। ऐसे में सीरिया से अमेरिकी सेना की वापसी को रणनीतिक बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि आगे यह देखना अहम होगा कि अमेरिका बातचीत की राह अपनाता है या सैन्य कार्रवाई को और तेज करता है।

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